(N/A) विधि: इस विधि में,अशुद्ध धातु को एनोड के रूप में उपयोग किया जाता है। उसी धातु की एक शुद्ध पट्टी को कैथोड के रूप में उपयोग किया जाता है। उन्हें उसी धातु के घुलनशील लवण वाले विद्युत-अपघटनी विलयन (electrolytic bath) में रखा जाता है। अधिक क्षारीय धातु विलयन में रह जाती है और कम क्षारीय धातु एनोड पंक (anode mud) के रूप में नीचे बैठ जाती है।
इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रोड विभव,अतिविभव (overpotential) और गिब्स-ऊर्जा की अवधारणाओं के आधार पर समझाया जा सकता है।
अभिक्रिया:
एनोड: $M \rightarrow M^{n+} + n e^-$
कैथोड: $M^{n+} + n e^- \rightarrow M$
कॉपर का शोधन इस विद्युत-अपघटनी विधि का उपयोग करके किया जाता है।
एनोड अशुद्ध कॉपर का होता है। शुद्ध कॉपर की पट्टी को कैथोड के रूप में लिया जाता है।
विद्युत-अपघट्य कॉपर सल्फेट का अम्लीय विलयन होता है और विद्युत-अपघटन का शुद्ध $(net)$ परिणाम कॉपर का एनोड से कैथोड में शुद्ध कॉपर के रूप में स्थानांतरण है।
एनोड: $Cu \rightarrow Cu^{2+} + 2e^-$
कैथोड: $Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu$
ब्लिस्टर कॉपर (blister copper) से अशुद्धियाँ एनोड पंक के रूप में जमा हो जाती हैं,जिसमें एंटीमनी,सेलेनियम,टेल्यूरियम,सिल्वर,गोल्ड और प्लैटिनम होते हैं। इन तत्वों की पुनः प्राप्ति $(recovery)$ शोधन की लागत को पूरा कर सकती है।