(N/A) संक्रमण धातुएं और उनके यौगिक अपनी उत्प्रेरकीय सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। यह मुख्य रूप से उनकी कई ऑक्सीकरण अवस्थाओं को अपनाने और संकुल बनाने की क्षमता के कारण है।
उदाहरण:
$(i)$ संपर्क प्रक्रम में वैनेडियम$(V)$ ऑक्साइड $(V_2O_5)$।
$(ii)$ हैबर प्रक्रम में सूक्ष्म विभाजित आयरन $(Fe)$।
$(iii)$ उत्प्रेरकीय हाइड्रोजनीकरण में सूक्ष्म विभाजित निकेल $(Ni)$।
उत्प्रेरकीय क्रिया की व्याख्या:
$(i)$ अधिशोषण: अभिकारक अणु उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषित हो जाते हैं। संक्रमण धातु परमाणु अभिकारक अणुओं के साथ बंध बनाने के लिए अपने $3d$ और $4s$ इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करते हैं। यह सतह पर अभिकारकों की सांद्रता को बढ़ाता है और अभिकारक अणुओं में बंधों को कमजोर करता है,जिससे सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है।
$(ii)$ परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं: संक्रमण धातुएं अपनी ऑक्सीकरण अवस्थाओं को बदल सकती हैं,जो कम सक्रियण ऊर्जा के साथ एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करने में मदद करती हैं।
उदाहरण: $Fe^{3+}$ आयन आयोडाइड $(I^-)$ और परसल्फेट $(S_2O_8^{2-})$ आयनों के बीच अभिक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं:
$(i)$ $2I^- + S_2O_8^{2-} \xrightarrow{Fe^{3+}} I_2 + 2SO_4^{2-}$
$(ii)$ $2Fe^{2+} + S_2O_8^{2-} \rightarrow 2Fe^{3+} + 2SO_4^{2-}$