(N/A) निर्माण: एल्कीन अम्ल उत्प्रेरक (तनु $HCl$ या $H_2SO_4$) की उपस्थिति में जल $(HOH)$ के साथ अभिक्रिया करके अल्कोहल बनाते हैं।
यदि एल्कीन असममित है,तो योग 'मार्कोवनिकोव नियम' के अनुसार होता है,अर्थात $-OH$ समूह अधिक प्रतिस्थापित कार्बन से और $-H$ परमाणु कम प्रतिस्थापित कार्बन से जुड़ता है।
$(b)$ क्रियाविधि: एल्कीन का अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन एक इलेक्ट्रॉनरागी योग अभिक्रिया है जो तीन चरणों में होती है।
चरण-$1$: इलेक्ट्रॉनरागी $H_3O^+$ (या $H^+$) द्वारा एल्कीन का प्रोटोनीकरण होकर अधिक स्थायी कार्बोकेटायन बनता है। यह धीमा और दर-निर्धारक चरण है क्योंकि $C=C$ का $\pi$-बंध टूटता है।
चरण-$2$: कार्बोकेटायन $(M)$ पर नाभिकरागी जल $(H_2\ddot{O}:)$ का आक्रमण होता है जिससे प्रोटोनेटेड अल्कोहल बनता है।
चरण-$3$: प्रोटोनेटेड अल्कोहल से प्रोटॉन का निष्कासन होकर अंतिम अल्कोहल उत्पाद प्राप्त होता है।