(N/A) प्राकृतिक संसाधनों का अवक्रमण केवल प्रदूषकों द्वारा ही नहीं,बल्कि उनके अनुचित उपयोग से भी होता है।
$(i)$ मृदा अपरदन और मरुस्थलीकरण: उपजाऊ ऊपरी मृदा के निर्माण में सदियाँ लग जाती हैं। लेकिन अत्यधिक खेती,अनियंत्रित चराई,वनों की कटाई और खराब सिंचाई पद्धतियों जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण ये उपजाऊ परतें आसानी से हट सकती हैं।
इससे भूमि का विखंडन होता है। जब ये बंजर भूमि के टुकड़े समय के साथ फैलते हैं और आपस में मिल जाते हैं,तो वे मरुस्थल का निर्माण करते हैं। मरुस्थलीकरण को शहरीकरण और असंतुलित भूमि प्रबंधन का एक बड़ा परिणाम माना जाता है।
$(ii)$ जल-भराव और मृदा लवणता: सिंचाई के दौरान पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने से खेतों में जल-भराव हो जाता है। इससे मिट्टी पानी से संतृप्त हो जाती है।
इस प्रक्रिया के दौरान,पानी मिट्टी में घुले हुए लवणों को सतह पर खींच लाता है। ये लवण भूमि की सतह पर एक पतली परत के रूप में जमा हो जाते हैं या पौधों की जड़ों के आसपास एकत्र होने लगते हैं।
लवणता की यह बढ़ती मात्रा पौधों की वृद्धि के लिए हानिकारक है और कृषि के लिए अत्यंत नुकसानदेह होती है।