(D) वायुमंडल की निचली परत (क्षोभमंडल) में बनने वाला ओजोन 'खराब' ओजोन कहलाता है,जो पौधों और जानवरों को नुकसान पहुँचाता है। वायुमंडल के ऊपरी भाग यानी समतापमंडल (stratosphere) में 'अच्छा' ओजोन पाया जाता है,जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी $(UV)$ किरणों को अवशोषित करके पृथ्वी के लिए एक कवच (shield) के रूप में कार्य करता है। $UV$ किरणें जीवों के लिए हानिकारक होती हैं क्योंकि वे $DNA$ और प्रोटीन द्वारा अवशोषित हो जाती हैं,जिससे उनके रासायनिक बंध टूट जाते हैं। ओजोन परत की मोटाई को डॉब्सन यूनिट $(DU)$ में मापा जाता है। समतापमंडल में आणविक ऑक्सीजन $(O_2)$ पर $UV$ किरणों की क्रिया से ओजोन लगातार बनता रहता है और उसका विघटन भी होता रहता है। इस उत्पादन और विघटन के बीच संतुलन होना आवश्यक है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) के उपयोग के कारण यह संतुलन बिगड़ गया है। CFCs का उपयोग मुख्य रूप से रेफ्रिजरेटर में किया जाता है। जब निचले वायुमंडल से मुक्त हुए CFCs समतापमंडल में पहुँचते हैं,तो $UV$ किरणें उनके साथ प्रतिक्रिया करके क्लोरीन परमाणु मुक्त करती हैं। ये क्लोरीन परमाणु ओजोन का विघटन करके उसे आणविक $O_2$ में बदल देते हैं,जिससे ओजोन परत पतली हो जाती है,जिसे 'ओजोन छिद्र' कहा जाता है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल $1987$ में कनाडा के मॉन्ट्रियल में हस्ताक्षरित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है (जो $1989$ से प्रभावी हुई),जिसका मुख्य उद्देश्य ओजोन को नष्ट करने वाले पदार्थों,विशेष रूप से CFCs के उत्सर्जन को नियंत्रित करना है।