मेंडल के प्रयोगों के आधार पर कारकों (factors),प्रभावी/अप्रभावी लक्षणों,जीनप्ररूप (genotype) और लक्षणप्ररूप (phenotype) की अवधारणाओं को समझाइए।

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(N/A) मेंडल ने प्रस्तावित किया कि कुछ ऐसा है जो युग्मकों के माध्यम से माता-पिता से संतानों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपरिवर्तित रूप से स्थानांतरित होता है। उन्होंने इन्हें 'कारक' (factors) कहा। आज हम इन्हें 'जीन' (genes) कहते हैं। अतः,जीन आनुवंशिकता की इकाइयाँ हैं।
जीन जो विपरीत लक्षणों के एक जोड़े को कोड करते हैं,उन्हें युग्मविकल्पी (alleles) के रूप में जाना जाता है।
वर्णमाला के प्रतीकों में,$F_1$ पीढ़ी में व्यक्त होने वाले लक्षण के लिए बड़े अक्षरों (capital letters) का उपयोग किया जाता है,और दूसरे लक्षण के लिए छोटे अक्षरों (small letters) का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए,लंबाई के लिए $T$ और बौनेपन के लिए $t$ का उपयोग किया जाता है। अब,$T$ और $t$ एक-दूसरे के युग्मविकल्पी हैं,जिन्हें $TT, Tt$ या $tt$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
यदि दोनों कारक समान हैं,तो जीव समयुग्मजी (homozygous) ($TT$ या $tt$) होता है।
$TT$ और $tt$ पौधों के जीनप्ररूप (genotype) का प्रतिनिधित्व करते हैं,जबकि 'लंबे' और 'बौने' शब्द लक्षणप्ररूप (phenotype) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
असमान कारकों की एक जोड़ी में,एक कारक दूसरे पर हावी हो जाता है और $F_1$ पीढ़ी में व्यक्त होता है। इसे प्रभावी कारक (dominant factor) कहा जाता है,और जो व्यक्त नहीं होता है उसे अप्रभावी कारक (recessive factor) कहा जाता है।
समयुग्मजी स्थिति में कारक समान होते हैं ($TT$ या $tt$),लेकिन विषमयुग्मजी (heterozygous) स्थिति में वे असमान होते हैं,जैसे $Tt$। $Tt$ और $tt$ के बीच के संकरण को एकसंकर संकरण प्रयोग (monohybrid experiment) कहा जाता है।

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