(N/A) $(1)$ किसी भी प्रजाति के सभी जीवों में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित होती है,जो सामान्यतः द्विगुणित $(2n)$ होती है।
$\Rightarrow$ जीवों में निषेचन के दौरान युग्मकों (जनन कोशिकाओं) के संलयन से एक नया जीव बनता है।
$\Rightarrow$ युग्मकों के निर्माण के दौरान अर्धसूत्रीविभाजन होता है,जिससे गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है और वे अगुणित $(n)$ हो जाते हैं।
$\Rightarrow$ जब दो अगुणित युग्मक आपस में जुड़ते हैं,तो बनने वाले युग्मनज (zygote) में गुणसूत्रों की संख्या पुनः द्विगुणित $(2n)$ हो जाती है।
$\Rightarrow$ इस प्रकार,पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्रों की विशिष्ट संख्या बनाए रखने के लिए अर्धसूत्रीविभाजन आवश्यक है।
$(2)$ अर्धसूत्रीविभाजन की पूर्वावस्था-$I$ (prophase-$I$) के दौरान क्रॉसिंग ओवर (crossing over) होता है,जिससे समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थ का आदान-प्रदान होता है।
$\Rightarrow$ यह प्रक्रिया जीन के नए संयोजन बनाती है,जिसके परिणामस्वरूप संतानों में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।
$\Rightarrow$ ऐसी विविधताएं प्राकृतिक चयन का आधार बनती हैं और प्रजातियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।