(A) क्षार धातुएं अपने बड़े आकार और कम आयनन एन्थैल्पी के कारण अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं। समूह में नीचे जाने पर इनकी अभिक्रियाशीलता बढ़ती है।
$(a)$ हवा के प्रति अभिक्रियाशीलता: क्षार धातुएं हवा में ऑक्साइड बनाती हैं। ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया: $4Li + O_2 \rightarrow 2Li_2O$,$2Na + O_2 \rightarrow Na_2O_2$,और $M + O_2 \rightarrow MO_2$ $(M = K, Rb, Cs)$। लिथियम नाइट्रोजन के साथ $Li_3N$ बनाता है।
पानी के प्रति अभिक्रियाशीलता: $2M + 2H_2O \rightarrow 2M^+ + 2OH^- + H_2$। लिथियम की जलयोजन ऊर्जा अधिक होने के कारण यह सोडियम की तुलना में कम तीव्र अभिक्रिया करती है।
डाइहाइड्रोजन के प्रति अभिक्रियाशीलता: $2M + H_2 \rightarrow 2M^+H^-$।
हैलोजन के प्रति अभिक्रियाशीलता: ये $M^+X^-$ प्रकार के आयनिक हैलाइड बनाते हैं।
$(b)$ अपचयन विभव: क्षार धातुओं का मानक इलेक्ट्रोड विभव $(E^{\ominus})$ अत्यधिक ऋणात्मक होता है,जिससे वे प्रबल अपचायक बन जाते हैं।
$(c)$ द्रव अमोनिया के साथ अभिक्रिया: क्षार धातुएं द्रव अमोनिया में घुलकर गहरे नीले रंग के,विद्युत चालक और अनुचुंबकीय विलयन बनाती हैं: $M + (x+y)NH_3 \rightarrow [M(NH_3)_x]^+ + [e(NH_3)_y]^-$. नीला रंग अमोनियेटेड इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है।