(N/A) $(i)$ सामान्य अभिक्रिया: इस अभिक्रिया में $\pi$-बंध टूटता है और हैलोजन परमाणु निकटवर्ती कार्बन परमाणुओं से $\sigma$-बंध द्वारा जुड़ जाते हैं।
$(ii)$ अभिक्रिया का प्रकार: जब एल्कीन $X_2$ ($X = Cl$ या $Br$) के साथ अभिक्रिया करता है,तो विसिनल डाइहेलाइड बनता है। यह एक इलेक्ट्रॉनस्नेही योगात्मक अभिक्रिया है। इस प्रक्रिया में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन संतृप्त डाइहेलाइड में परिवर्तित हो जाता है। अभिक्रिया के दौरान एक चक्रीय हैलोनियम आयन मध्यवर्ती के रूप में बनता है।
$(iii)$ एल्कीन क्लोरीन $(Cl_2)$ और ब्रोमीन $(Br_2)$ के साथ अभिक्रिया करके योगात्मक उत्पाद देते हैं और क्रमशः विसिनल डाइक्लोराइड और विसिनल डाइब्रोमाइड बनाते हैं।
उदाहरण $(a)$ क्लोरीनीकरण:
$CH_2=CH_2 + Cl_2 \rightarrow CH_2(Cl)-CH_2(Cl)$ ($1,2$-डाइक्लोरोएथेन)
$CH_3-CH=CH_2 + Cl_2 \rightarrow CH_3-CH(Cl)-CH_2(Cl)$ ($1,2$-डाइक्लोरोप्रोपेन)
उदाहरण $(b)$ ब्रोमीनीकरण (असंतृप्ति का परीक्षण):
$CH_2=CH_2 + Br_2 \xrightarrow{CCl_4} CH_2(Br)-CH_2(Br)$ ($1,2$-डाइब्रोमोएथेन)
$CH_3-CH=CH_2 + Br_2 \xrightarrow{CCl_4} CH_3-CH(Br)-CH_2(Br)$ ($1,2$-डाइब्रोमोप्रोपेन)
सामान्य अभिक्रिया:
$R_2C=CR_2 + X_2 \rightarrow R_2C(X)-CR_2(X)$ (विसिनल डाइहेलाइड)