| श्रेणीक्रम संयोजन | समांतर क्रम संयोजन |
| $(1)$ श्रेणीक्रम संयोजन में, प्रत्येक संधारित्र पर आवेश का परिमाण समान होता है। | $(1)$ समांतर क्रम संयोजन में, प्रत्येक संधारित्र के सिरों पर विभवांतर समान होता है। |
| $(2)$ प्रभावी धारिता का व्युत्क्रम प्रत्येक संधारित्र की धारिता के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है: $\frac{1}{C_{eq}} = \sum \frac{1}{C_i}$. | $(2)$ प्रभावी धारिता व्यक्तिगत धारिताओं के योग के बराबर होती है: $C_{eq} = \sum C_i$. |
| $(3)$ प्रभावी धारिता परिपथ में मौजूद सबसे छोटी धारिता से भी कम होती है। | $(3)$ प्रभावी धारिता परिपथ में मौजूद सबसे बड़ी धारिता से भी अधिक होती है। |
| $(4)$ संधारित्रों की संख्या बढ़ने पर प्रभावी धारिता घटती है। | $(4)$ संधारित्रों की संख्या बढ़ने पर प्रभावी धारिता बढ़ती है। |
| $(5)$ संयोजन के सिरों पर कुल विभवांतर प्रत्येक संधारित्र के विभवांतर के योग के बराबर होता है: $V = \sum V_i$. | $(5)$ संयोजन पर कुल आवेश प्रत्येक संधारित्र पर आवेश के योग के बराबर होता है: $Q = \sum Q_i$. |
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