(N/A) $\rightarrow$ स्लाइम मोल्ड मृतोपजीवी प्रोटिस्ट हैं।
$\rightarrow$ इनका शरीर सड़ती हुई टहनियों और पत्तियों पर गति करता है और कार्बनिक पदार्थों का भक्षण करता है।
$\rightarrow$ अनुकूल परिस्थितियों में,वे $Plasmodium$ नामक एक समूह बनाते हैं जो कई फीट तक बढ़ और फैल सकता है।
$\rightarrow$ प्रतिकूल परिस्थितियों के दौरान,$Plasmodium$ विभेदित होकर फलनकाय (fruiting bodies) बनाता है,जिनके सिरों पर बीजाणु (spores) होते हैं।
$\rightarrow$ बीजाणुओं में सच्ची कोशिका भित्ति होती है।
$\rightarrow$ ये अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कई वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।
$\rightarrow$ शारीरिक संगठन: स्लाइम मोल्ड का शरीर श्लेष्म (mucilage) से ढका होता है जिसकी प्रकृति जेली जैसी होती है; इनमें क्लोरोफिल नहीं होता है।
$\rightarrow$ ये प्लाज्मा झिल्ली से घिरे होते हैं। हालाँकि,बीजाणुओं में सेलुलोज की बनी कोशिका भित्ति होती है।
$\rightarrow$ विशेष विशेषताएँ: एंटन डी बेरी ने इन्हें जानवरों से संबंधित माना और इन्हें $Mycetozoa$ कहा।
$\rightarrow$ इन्हें 'कवक-प्राणी' भी कहा जाता है क्योंकि ये अपनी प्रोटिस्टियन प्रकृति के कारण जानवरों और कवक दोनों के सामान्य लक्षण साझा करते हैं।
$\rightarrow$ ये अपने अमीबीय प्लाज्मोडियल चरण में प्रोटोजोआ के समान और बीजाणु निर्माण में सच्चे कवक के समान होते हैं। अकोशिकीय स्लाइम मोल्ड ($Plasmodial$ स्लाइम मोल्ड) आमतौर पर मृत और सड़ते हुए पादप पदार्थों पर पाए जाते हैं।
$\rightarrow$ कोशिकीय स्लाइम मोल्ड नम मिट्टी की ह्यूमस वाली ऊपरी परतों में पाए जाते हैं।
$\rightarrow$ जब भोजन की आपूर्ति कम होती है या स्थितियाँ अनुकूल नहीं होती हैं,तो अमीबीय कोशिकाएँ बिना किसी संलयन के एकत्रित हो जाती हैं।
$\rightarrow$ इस एकत्रित द्रव्यमान को $pseudoplasmodium$ कहा जाता है।
$\rightarrow$ कोशिकीय स्लाइम मोल्ड के उदाहरण $Dictyostelium$ और $Polysphondylium$ हैं।
$\rightarrow$ आर्थिक महत्व: स्लाइम मोल्ड फायदेमंद होते हैं क्योंकि वे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन में मदद करते हैं।
$\rightarrow$ उदाहरण: $Physarum$,$Stemonitis$,$Comatricha$,$Trichia$.