(N/A) विकास एक ऐसा शब्द है जिसमें वे सभी परिवर्तन शामिल हैं जो एक जीव अपने जीवन चक्र के दौरान,बीज के अंकुरण से लेकर जीर्णता (senescence) तक से गुजरता है।
उच्च पादपों की एक कोशिका के विकास का निर्माण करने वाली प्रक्रियाओं का क्रम इस प्रकार है: विभज्योतक कोशिका (Meristematic cell) $\rightarrow$ जीवद्रव्यी वृद्धि (Plasmatic growth) $\rightarrow$ विस्तार (Expansion/Elongation) $\rightarrow$ विभेदन (Differentiation) $\rightarrow$ परिपक्वन (Maturation) $\rightarrow$ परिपक्व कोशिका (Mature cell) $\rightarrow$ जीर्णता (Senescence) $\rightarrow$ मृत्यु (Death)।
यह प्रक्रिया ऊतकों और अंगों पर भी लागू होती है।
व्यापक अर्थों में,विकास पादपों में वृद्धि और विभेदन का कुल योग है।
वृद्धि और विभेदन की विकासात्मक प्रक्रिया कई आंतरिक और बाह्य कारकों द्वारा नियंत्रित होती है:
$(i)$ आंतरिक कारक: इसमें अंतःकोशिकीय (आनुवंशिक) या अंतरकोशिकीय कारक (जैसे पादप वृद्धि नियामक) दोनों शामिल हैं।
$(ii)$ बाह्य कारक: इसमें प्रकाश,तापमान,जल,ऑक्सीजन,पोषण आदि शामिल हैं।