(N/A) विरचन (बनाने की विधि):
- सबसे सरल ज्ञात बोरोन हाइड्राइड डाइबोरेन है। इसे डाईएथिल ईथर में बोरोन ट्राइफ्लोराइड की $LiAlH_{4}$ के साथ अभिक्रिया द्वारा बनाया जाता है।
$4 BF_{3} + 3 LiAlH_{4} \rightarrow 2 B_{2}H_{6} + 3 LiF + 3 AlF_{3}$
- डाइबोरेन बनाने की एक सुविधाजनक प्रयोगशाला विधि में सोडियम बोरोहाइड्राइड का आयोडीन द्वारा ऑक्सीकरण किया जाता है।
$I_{2} + 2 NaBH_{4} \rightarrow B_{2}H_{6} + 2 NaI + H_{2}$
- औद्योगिक स्तर पर डाइबोरेन का उत्पादन $BF_{3}$ की सोडियम हाइड्राइड के साथ अभिक्रिया द्वारा किया जाता है।
$2 BF_{3} + 6 NaH \stackrel{450 \ K}{\longrightarrow} B_{2}H_{6} + 6 NaF$
भौतिक गुणधर्म:
- डाइबोरेन एक रंगहीन,अत्यधिक विषैली गैस है जिसका क्वथनांक $180 \ K$ है।
- वायु के संपर्क में आने पर डाइबोरेन स्वतः जलने लगता है।
- यह ऑक्सीजन में जलकर अत्यधिक ऊर्जा मुक्त करता है।
रासायनिक गुणधर्म:
- बोरेन जल द्वारा आसानी से जल-अपघटित होकर बोरिक अम्ल देते हैं।
$B_{2}H_{6(g)} + 6 H_{2}O_{(l)} \rightarrow 2 B(OH)_{3(aq)} + 6 H_{2(g)}$
- डाइबोरेन लुईस क्षारों $(L)$ के साथ विदलन अभिक्रियाएं करके बोरेन एडक्ट्स,$BH_{3} \cdot L$ बनाते हैं।
$B_{2}H_{6} + 2 NMe_{3} \rightarrow 2 BH_{3} \cdot NMe_{3}$
$B_{2}H_{6} + 2 CO \rightarrow 2 BH_{3} \cdot CO$
- अमोनिया की डाइबोरेन के साथ अभिक्रिया से प्रारंभ में $B_{2}H_{6} \cdot 2 NH_{3}$ प्राप्त होता है,जिसे $[BH_{2}(NH_{3})_{2}]^{+}[BH_{4}]^{-}$ के रूप में लिखा जाता है; इसे और गर्म करने पर बोराज़ीन,$B_{3}N_{3}H_{6}$ प्राप्त होता है,जिसे इसके एकांतर $BH$ और $NH$ समूहों वाली वलय संरचना के कारण "अकार्बनिक बेंजीन" कहा जाता है।
$3 B_{2}H_{6} + 6 NH_{3}$ $\rightarrow 2[BH_{2}(NH_{3})_{2}]^{+}[BH_{4}]^{-} \stackrel{\Delta}{}$ ${\longrightarrow} 2 B_{3}N_{3}H_{6} + 12 H_{2}$