(N/A) जब हम $Si$ या $Ge$ में एक पंच-संयोजी (pentavalent) तत्व (जैसे $As, Sb, P$) मिलाते हैं, तो अशुद्धि परमाणु क्रिस्टल जालक में एक स्थान ले लेता है। इसके चार संयोजी इलेक्ट्रॉन पड़ोसी $Si$ या $Ge$ परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाते हैं, जबकि पांचवां इलेक्ट्रॉन अपने मूल परमाणु से बहुत कमजोर रूप से बंधा रहता है। इसका कारण यह है कि बंध बनाने में भाग लेने वाले चार इलेक्ट्रॉन पांचवें इलेक्ट्रॉन को नाभिक से प्रभावी रूप से अलग कर देते हैं।
परिणामस्वरूप, इस इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए आवश्यक आयनीकरण ऊर्जा बहुत कम होती है ($Ge$ के लिए $ \approx 0.01 \, eV$ और $Si$ के लिए $0.05 \, eV$), जिससे यह कमरे के तापमान पर भी जालक में गति करने के लिए स्वतंत्र हो जाता है। चूंकि पंच-संयोजी डोपेंट चालन के लिए एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन दान करता है, इसलिए इसे दाता (donor) अशुद्धि कहा जाता है। $n$-प्रकार के अर्धचालकों में, मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या $(n_e)$ होल्स की संख्या $(n_h)$ से बहुत अधिक होती है, अर्थात $n_e \gg n_h$। मुख्य आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन (ऋणात्मक) होते हैं, इसलिए इसे $n$-प्रकार कहा जाता है।
जब $Si$ या $Ge$ में एक त्रि-संयोजी (trivalent) तत्व (जैसे $Al, B, In$) मिलाया जाता है, तो अशुद्धि परमाणु $Si$ या $Ge$ परमाणु की जगह ले लेता है। इसके तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन पड़ोसियों के साथ सहसंयोजक बंध बनाते हैं, लेकिन चौथे बंध में इलेक्ट्रॉन की कमी होती है, जिससे एक 'होल' बन जाता है। यह होल पड़ोसी सहसंयोजक बंध से एक इलेक्ट्रॉन को आकर्षित कर सकता है, जिससे होल क्रिस्टल में गति करता है। इस प्रकार, त्रि-संयोजी डोपेंट को ग्राही (acceptor) अशुद्धि कहा जाता है। $p$-प्रकार के अर्धचालकों में, मुख्य आवेश वाहक होल्स (धनात्मक) होते हैं, इसलिए इसे $p$-प्रकार कहा जाता है। यहाँ, $n_h \gg n_e$।