(N/A) कथन: किसी पिंड के संवेग में परिवर्तन की समय दर उस पर लगने वाले परिणामी बल के सीधे आनुपातिक होती है और यह परिवर्तन परिणामी बल की दिशा में होता है।
मान लीजिए कि $m$ द्रव्यमान वाले पिंड पर $\Delta t$ समयांतराल के लिए परिणामी बल $\vec{F}$ कार्य करता है। इस दौरान इसका वेग $\vec{v}$ से बदलकर $\vec{v} + \Delta \vec{v}$ हो जाता है।
प्रारंभिक संवेग: $\vec{p}_i = m\vec{v}$
अंतिम संवेग: $\vec{p}_f = m(\vec{v} + \Delta \vec{v})$
संवेग में परिवर्तन:
$\Delta \vec{p} = \vec{p}_f - \vec{p}_i = m\Delta \vec{v}$
गति के दूसरे नियम के अनुसार:
$\vec{F} \propto \frac{\Delta \vec{p}}{\Delta t} \implies \vec{F} = k \frac{\Delta \vec{p}}{\Delta t}$
$\Delta t \to 0$ लेने पर:
$\vec{F} = \frac{d\vec{p}}{dt} = m\vec{a}$ (यदि द्रव्यमान स्थिर हो)।
महत्वपूर्ण बिंदु:
$(i)$ न्यूटन का दूसरा नियम $\vec{F} = \frac{d\vec{p}}{dt}$ है। यदि द्रव्यमान स्थिर है,तो $\vec{F} = m\vec{a}$।
$(ii)$ यदि परिणामी बाहरी बल शून्य है,तो $\vec{a} = 0$,जिसका अर्थ है कि वेग स्थिर रहता है,जो न्यूटन के गति के पहले नियम के अनुरूप है।
$(iii)$ यह नियम बल का परिमाण देता है। यह एक सदिश राशि है जिसके घटक: $F_x = ma_x, F_y = ma_y, F_z = ma_z$ हैं।
$(iv)$ यह समीकरण बिंदु वस्तुओं,दृढ़ पिंडों या कणों के निकाय पर लागू होता है।
$(v)$ यह नियम किसी विशेष क्षण पर बल और त्वरण के बीच संबंध बताता है; यह वस्तु की गति के इतिहास पर निर्भर नहीं करता है।