(N/A) एल्डोल संघनन:
$(i)$ जिन एल्डिहाइड और कीटोन यौगिकों में कम से कम एक $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होता है,वे तनु क्षार (बेस) की उपस्थिति में अभिक्रिया करके क्रमशः $\beta$-हाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड (एल्डोल) या $\beta$-हाइड्रॉक्सी कीटोन (कीटोल) बनाते हैं। इस अभिक्रिया को एल्डोल संघनन कहा जाता है।
$(ii)$ 'एल्डोल' नाम उत्पाद में मौजूद दो कार्यात्मक समूहों: एल्डिहाइड और अल्कोहल से लिया गया है।
$(iii)$ गर्म करने पर,ये एल्डोल और कीटोल उत्पाद आसानी से पानी का एक अणु खोकर $\alpha, \beta$-असंतृप्त कार्बोनिल यौगिक बनाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को भी एल्डोल संघनन कहा जाता है।
$(b)$ उदाहरण: एसिटाल्डिहाइड $(CH_3CHO)$ का एल्डोल संघनन:
$2CH_3CHO$ $\xrightarrow{\text{dil. NaOH}} CH_3CH(OH)CH_2CHO$ $\xrightarrow{\Delta, -H_2O} CH_3CH=CHCHO$ (ब्यूट$-2-$इनल)।
$(c)$ मुख्य बिंदु:
$(i)$ केवल वे एल्डिहाइड और कीटोन जिनमें कम से कम एक $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु होता है,यह अभिक्रिया देते हैं क्योंकि $\alpha$-हाइड्रोजन प्रकृति में अम्लीय होते हैं।
$(ii)$ बेंजल्डिहाइड $(C_6H_5CHO)$ और ट्राईमिथाइल एसिटाल्डिहाइड $((CH_3)_3CCHO)$ जैसे यौगिकों में $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते हैं,इसलिए वे एल्डोल संघनन नहीं देते हैं।