(N/A) $1$. शुक्राणुजनन: शुक्राणुओं का निर्माण वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में 'शुक्राणुजनन' (spermatogenesis) नामक प्रक्रिया द्वारा होता है।
$2$. परिवहन: शुक्रजनक नलिकाओं से मुक्त हुए शुक्राणु सहायक नलिकाओं द्वारा परिवहन किए जाते हैं,जिनमें वृषण जाल (rete testis),शुक्रवाहिकाएं (vasa efferentia),अधिवृषण (epididymis) और शुक्रवाहिनी (vas deferens) शामिल हैं।
$3$. परिपक्वता: अधिवृषण से गुजरते समय,शुक्राणु शारीरिक रूप से परिपक्व होते हैं,जिससे वे गतिशीलता और अंडाणु को निषेचित करने की क्षमता प्राप्त करते हैं।
$4$. वीर्य का निर्माण: सहायक ग्रंथियों (शुक्राशय,प्रोस्टेट ग्रंथि और बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि) का स्राव शुक्राणुओं की परिपक्वता और उत्तरजीविता के लिए आवश्यक है। शुक्राणुओं के साथ मिलकर सेमिनल प्लाज्मा 'वीर्य' (semen) का निर्माण करता है।
$5$. हार्मोनल विनियमन: नर सहायक नलिकाओं और ग्रंथियों के कार्य मुख्य रूप से वृषण हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) द्वारा नियंत्रित और बनाए रखे जाते हैं।