(N/A) पुष्पी पादपों में जल द्वारा परागण काफी दुर्लभ है,क्योंकि अधिकांश जलीय पौधे परागण के लिए कीटों या हवा पर निर्भर करते हैं।
मुख्य विशेषताएं और क्रियाविधि इस प्रकार हैं:
$1$. दुर्लभ घटना: जल द्वारा परागण लगभग $30$ वंशों तक ही सीमित है,जो मुख्य रूप से एकबीजपत्री हैं।
$2$. उदाहरण: इसमें $Vallisneria$ और $Hydrilla$ जैसे मीठे पानी के पौधे और $Zostera$ जैसी समुद्री घास शामिल हैं।
$3$. सतह पर परागण: $Vallisneria$ में,मादा पुष्प एक लंबे,कुंडलित डंठल के माध्यम से जल की सतह तक पहुँचता है। नर पुष्प या परागकण जल की सतह पर मुक्त होते हैं और जल की धाराओं द्वारा निष्क्रिय रूप से बहकर मादा पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं।
$4$. निमज्जित परागण: समुद्री घास में,पुष्प जल में डूबे रहते हैं। परागकण लंबे और रिबन जैसे होते हैं,जिससे वे जल के भीतर निष्क्रिय रूप से बहकर वर्तिकाग्र तक पहुँच सकते हैं।
$5$. सुरक्षा: जल द्वारा परागित होने वाली अधिकांश प्रजातियों में,परागकणों को भीगने से बचाने के लिए उन पर श्लेष्मी (mucilaginous) आवरण होता है।
$6$. पुष्पीय लक्षण: जल द्वारा परागित पुष्प (हवा द्वारा परागित पुष्पों की तरह) आमतौर पर बहुत रंगीन नहीं होते हैं और मकरंद (nectar) उत्पन्न नहीं करते हैं।