(N/A) एल्डिहाइड और कीटोन हाइड्रोजन साइनाइड $(HCN)$ के साथ अभिक्रिया करके साइनोहाइड्रिन देते हैं।
$(i)$ यह अभिक्रिया शुद्ध $HCN$ के साथ बहुत धीमी गति से होती है।
$(ii)$ इसलिए,इसे एक क्षार (base) द्वारा उत्प्रेरित किया जाता है। उत्पन्न साइनाइड आयन $(CN^-)$,एक प्रबल न्यूक्लियोफाइल होने के कारण,कार्बोनिल कार्बन पर आसानी से जुड़कर साइनोहाइड्रिन बनाता है।
$(iii)$ अभिक्रिया की क्रियाविधि इस प्रकार है:
$HCN + OH^- \rightleftharpoons :CN^- + H_2O$
$R_2C=O + :CN^- \rightleftharpoons R_2C(O^-)(CN)$ (चतुष्फलकीय मध्यवर्ती)
$R_2C(O^-)(CN) + H_2O \rightleftharpoons R_2C(OH)(CN) + OH^-$
$(iv)$ नोट: अभिकारक में कार्बोनिल कार्बन $sp^2$ संकरित होता है,जबकि साइनोहाइड्रिन उत्पाद में यह $sp^3$ संकरित हो जाता है। यह एक न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रिया है।