(N/A) अगुणित-द्विगुणित (haplo-diplontic) जीवन चक्र की विशेषता एक बहुकोशिकीय अगुणित युग्मकोद्भिद (gametophytic) चरण और एक बहुकोशिकीय द्विगुणित बीजाणुद्भिद (sporophytic) चरण के बीच का एकांतरण है।
यह पैटर्न ब्रायोफाइट्स और टेरिडोफाइट्स में देखा जाता है।
$1$. युग्मकोद्भिद चरण $(n)$: यह चरण अगुणित होता है और समसूत्री विभाजन द्वारा नर और मादा युग्मक उत्पन्न करता है। नर जनन अंग पुंधानी (antheridium) है (जो पुमणु उत्पन्न करता है) और मादा जनन अंग स्त्रीधानी (archegonium) है (जो अंड कोशिका उत्पन्न करती है)।
$2$. निषेचन (Syngamy): नर युग्मक (पुमणु) और मादा युग्मक (अंड कोशिका) के संलयन से एक द्विगुणित युग्मनज $(2n)$ बनता है।
$3$. बीजाणुद्भिद चरण $(2n)$: युग्मनज समसूत्री विभाजन द्वारा विकसित होकर एक बहुकोशिकीय द्विगुणित बीजाणुद्भिद (sporophyte) बनाता है। बीजाणुद्भिद बीजाणुधानी उत्पन्न करता है,जिसमें बीजाणु मातृ कोशिकाएं होती हैं।
$4$. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): बीजाणु मातृ कोशिकाएं अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित बीजाणु $(n)$ उत्पन्न करती हैं,जो अंकुरित होकर एक नया युग्मकोद्भिद बनाते हैं,इस प्रकार जीवन चक्र पूरा होता है।
पीढ़ियों का यह एकांतरण पादप जीवन चक्र की एक प्रमुख विशेषता है।