कुछ प्रकार के पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation) का अभ्यास क्यों किया जाता है?

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(N/A) कायिक प्रवर्धन का अभ्यास निम्नलिखित कारणों से किया जाता है:
$1$. यह प्रजनन की एक अधिक तीव्र और आसान विधि है।
$2$. यह उन क्षेत्रों में पौधों को उगाने में मदद करता है जहाँ बीजों का अंकुरण विफल हो जाता है।
$3$. यह उन पौधों के प्रसार के लिए बहुत उपयोगी है जो व्यवहार्य बीज उत्पन्न नहीं करते हैं या बहुत कम बीज उत्पन्न करते हैं।
$4$. यह कम समय में बड़ी संख्या में आनुवंशिक रूप से समान पौधे उत्पन्न करने की एक कुशल विधि है।
$5$. उदाहरण के लिए,आलू का कंद (Tuber) और अदरक का प्रकंद (Rhizome)।

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