बेंजीन में तीन द्वि-आबंध होने के बावजूद यह असाधारण रूप से स्थिर क्यों है?

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(N/A) बेंजीन चित्र में दिखाए गए अनुसार अनुनादी संरचनाओं का एक संकर है।
बेंजीन में सभी छह कार्बन परमाणु $sp^{2}$ संकरित होते हैं।
प्रत्येक कार्बन परमाणु की दो $sp^{2}$ संकरित कक्षकें षट्कोणीय तल में छह $C-C$ सिग्मा आबंध बनाने के लिए निकटवर्ती कार्बन परमाणुओं की $sp^{2}$ संकरित कक्षकों के साथ अतिव्यापन करती हैं।
प्रत्येक कार्बन परमाणु पर शेष $sp^{2}$ संकरित कक्षक छह $C-H$ सिग्मा आबंध बनाने के लिए हाइड्रोजन की $s$-कक्षक के साथ अतिव्यापन करती है।
प्रत्येक कार्बन परमाणु की शेष असंकरित $p$-कक्षक वलय के तल के ऊपर और नीचे एक निरंतर $\pi$-इलेक्ट्रॉन बादल बनाने के लिए पार्श्व अतिव्यापन करती है।
छह $\pi$-इलेक्ट्रॉन पूरे वलय पर विस्थानीकृत (delocalized) होते हैं,जो बेंजीन अणु को अतिरिक्त स्थिरता प्रदान करते हैं। इसी विस्थानीकरण के कारण तीन द्वि-आबंध होने के बावजूद बेंजीन असाधारण रूप से स्थिर है।

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