(N/A) $NH_{3}$ का द्विध्रुव आघूर्ण $NF_{3}$ से अधिक होता है।
$NH_{3}$ का द्विध्रुव आघूर्ण = $1.47 \ D = 4.9 \times 10^{-30} \ Cm$
$NF_{3}$ का द्विध्रुव आघूर्ण = $0.23 \ D = 0.8 \times 10^{-30} \ Cm$
$\mu(NH_{3}) > \mu(NF_{3})$: दोनों अणुओं की ज्यामिति पिरामिडीय होती है और नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) उपस्थित होता है।
विद्युत ऋणात्मकता के मान: $H(2.1)$,$N(3.0)$,और $F(4.0)$ हैं। $NH_{3}$ में नाइट्रोजन आंशिक रूप से ऋणात्मक है,लेकिन $NF_{3}$ में फ्लोरीन की उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण नाइट्रोजन आंशिक रूप से धनात्मक होता है।
$NH_{3}$ में,एकाकी युग्म के कारण उत्पन्न कक्षीय द्विध्रुव (orbital dipole),$N-H$ बंधों के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा में ही होता है,जिससे कुल द्विध्रुव आघूर्ण बढ़ जाता है।
$NF_{3}$ में,एकाकी युग्म के कारण उत्पन्न कक्षीय द्विध्रुव,तीन $N-F$ बंधों के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की विपरीत दिशा में होता है। यह बंध आघूर्णों के प्रभाव को कम कर देता है,जिसके परिणामस्वरूप शुद्ध द्विध्रुव आघूर्ण बहुत कम प्राप्त होता है।