(N/A) सबसे सरल विद्युत अपघटनी सेलों में से एक में कॉपर सल्फेट $(CuSO_4)$ के जलीय घोल में डूबी हुई दो कॉपर की पट्टियाँ होती हैं।
संरचना: इसमें कॉपर सल्फेट के जलीय घोल में डूबे हुए दो कॉपर इलेक्ट्रोड होते हैं। एक इलेक्ट्रोड एनोड के रूप में और दूसरा कैथोड के रूप में कार्य करता है।
कार्यप्रणाली: जब दोनों इलेक्ट्रोड पर $DC$ वोल्टेज लागू किया जाता है,तो $Cu^{2+}$ आयन कैथोड (ऋणात्मक आवेशित) की ओर बढ़ते हैं और अपचयन (reduction) से गुजरते हैं:
$Cu^{2+}_{(aq)} + 2e^{-} \rightarrow Cu_{(s)}$
कैथोड पर कॉपर धातु जमा हो जाती है।
एनोड पर,कॉपर धातु का $Cu^{2+}$ आयनों में ऑक्सीकरण होता है:
$Cu_{(s)} \rightarrow Cu^{2+}_{(aq)} + 2e^{-}$
इस प्रकार,एनोड पर कॉपर घुल जाता है (ऑक्सीकरण होता है)।
कुल अभिक्रिया: $Cu_{(s)} (\text{एनोड}) \rightarrow Cu_{(s)} (\text{कैथोड})$ (अशुद्ध $\rightarrow$ शुद्ध)।
उपयोग: यह प्रक्रिया कॉपर के विद्युत अपघटनी शोधन का आधार है,जिसमें अशुद्ध कॉपर को उच्च शुद्धता वाले कॉपर में परिवर्तित किया जाता है। अशुद्ध कॉपर का उपयोग एनोड के रूप में किया जाता है,जो विद्युत धारा प्रवाहित करने पर घुल जाता है और शुद्ध कॉपर कैथोड पर जमा हो जाता है।