(N/A) $(i)$ $-CH_3$ समूह का $+I$ प्रभाव $O-H$ बंध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ाता है,जिससे प्रोटॉन का निकलना कठिन हो जाता है। इसके विपरीत,$F$ का $-I$ प्रभाव $O-H$ बंध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करता है,जिससे प्रोटॉन आसानी से निकल जाता है। इसलिए,$CH_2FCO_2H$ अम्ल $CH_3CO_2H$ से अधिक प्रबल है।
$(ii)$ $F$ का $-I$ प्रभाव $Cl$ से अधिक प्रबल होता है। इसलिए,$CH_2FCO_2H$ अम्ल $CH_2ClCO_2H$ की तुलना में अधिक आसानी से प्रोटॉन मुक्त कर सकता है। अतः,$CH_2FCO_2H$ अधिक प्रबल अम्ल है।
$(iii)$ प्रेरणिक प्रभाव (Inductive effect) दूरी बढ़ने के साथ घटता है। $CH_3CHFCH_2CO_2H$ में $F$ का $-I$ प्रभाव $CH_2FCH_2CH_2CO_2H$ की तुलना में कार्बोक्सिल समूह के अधिक निकट है। अतः,$CH_3CHFCH_2CO_2H$ अधिक प्रबल अम्ल है।
$(iv)$ $-CF_3$ समूह के प्रबल $-I$ प्रभाव के कारण,$p-(trifluoromethyl)benzoic$ अम्ल में प्रोटॉन का निकलना आसान है। इसके विपरीत,$p-toluic$ अम्ल में $-CH_3$ समूह का $+I$ प्रभाव प्रोटॉन के निकलने को कठिन बनाता है। इसलिए,$F_3C-C_6H_4-COOH$ अम्ल $H_3C-C_6H_4-COOH$ से अधिक प्रबल है।