जब $RNA$ का जल-अपघटन किया जाता है,तो प्राप्त विभिन्न क्षारों (bases) की मात्राओं के बीच कोई संबंध नहीं होता है। यह तथ्य $RNA$ की संरचना के बारे में क्या बताता है?

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(N/A) $DNA$ अणु द्वि-रज्जुक (double-stranded) होता है,जिसमें क्षारों का युग्मन होता है। एडेनिन $(A)$ हमेशा थाइमिन $(T)$ के साथ और साइटोसिन $(C)$ हमेशा ग्वानिन $(G)$ के साथ युग्मित होता है। इसलिए,$DNA$ के जल-अपघटन पर,उत्पन्न एडेनिन की मात्रा थाइमिन के बराबर होती है और इसी प्रकार,साइटोसिन की मात्रा ग्वानिन के बराबर होती है।
लेकिन जब $RNA$ का जल-अपघटन किया जाता है,तो प्राप्त विभिन्न क्षारों की मात्राओं के बीच कोई संबंध नहीं होता है। अतः,$RNA$ एकल-रज्जुक (single-stranded) होता है।

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नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: शर्करा की $1'-$स्थिति पर एक बेस के जुड़ने से बनने वाली इकाई को न्यूक्लियोसाइड कहा जाता है।
कथन $II$: जब न्यूक्लियोसाइड शर्करा के $5'-$स्थान पर फास्फोरस अम्ल से जुड़ता है,तो हमें न्यूक्लियोटाइड प्राप्त होता है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

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