(N/A) $(CN)_{2}$,$CN^{-}$,और $CNO^{-}$ में कार्बन की ऑक्सीकरण संख्या क्रमशः $+3$,$+2$,और $+4$ है।
$1$. $(CN)_{2}$ में,मान लीजिए $C$ की ऑक्सीकरण संख्या $x$ है। चूँकि $N$ का मान $-3$ है,$2(x - 3) = 0$,अतः $x = +3$।
$2$. $CN^{-}$ में,$C$ की ऑक्सीकरण संख्या $+2$ है $(x + (-3) = -1)$।
$3$. $CNO^{-}$ में,$C$ की ऑक्सीकरण संख्या $+4$ है $(x - 3 - 2 = -1)$।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
$(C^{+3}N)_{2}(g) + 2OH^{-}(aq) \rightarrow C^{+2}N^{-}(aq) + C^{+4}NO^{-}(aq) + H_{2}O(l)$
यह देखा जा सकता है कि एक ही तत्व (कार्बन) का एक साथ अपचयन ($+3$ से $+2$) और ऑक्सीकरण ($+3$ से $+4$) हो रहा है। जिन अभिक्रियाओं में एक ही पदार्थ का अपचयन और ऑक्सीकरण दोनों होता है,उन्हें असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रियाएँ कहा जाता है। अतः,सायनोजन का क्षारीय अपघटन असमानुपातन अभिक्रिया का एक उदाहरण है।