(N/A) पुटकीय चरण के दौरान,अग्र पिट्यूटरी से गोनाडोट्रोपिन ($LH$ और $FSH$) का स्राव धीरे-धीरे बढ़ता है। ये हार्मोन डिम्बग्रंथि पुटिकाओं (ovarian follicles) के विकास और परिपक्वता को उत्तेजित करते हैं। जैसे-जैसे पुटिकाएं बढ़ती हैं,वे एस्ट्रोजन का अधिक स्राव करती हैं।
अंडोत्सर्ग चरण में,विशेष रूप से चक्र के $14$ वें दिन,$LH$ और $FSH$ दोनों अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच जाते हैं,जिसे $LH$ सर्ज कहा जाता है। $LH$ का यह तीव्र उछाल ग्राफियन पुटिका के फटने को प्रेरित करता है,जिससे अंडोत्सर्ग होता है। अंडोत्सर्ग के बाद,फटी हुई पुटिका कॉर्पस ल्यूटियम में बदल जाती है,जो प्रोजेस्टेरोन की बड़ी मात्रा का स्राव करती है,जबकि एस्ट्रोजन का स्तर उच्च बना रहता है।