(N/A) विषमांगी उत्प्रेरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उत्प्रेरक और अभिकारक अलग-अलग अवस्थाओं में होते हैं। इस प्रक्रिया की क्रियाविधि को अधिशोषण सिद्धांत द्वारा समझाया जा सकता है,जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल हैं:
$i$. ठोस उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारक अणुओं का अधिशोषण।
$ii$. मध्यवर्ती के निर्माण के माध्यम से सतह पर रासायनिक अभिक्रिया का होना।
$iii$. उत्प्रेरक की सतह से उत्पादों का विशोषण (desorption)।
$iv$. उत्प्रेरक की सतह से उत्पादों का दूर विसरण।
इस प्रक्रिया में,ठोस उत्प्रेरक की सतह सक्रिय स्थान प्रदान करती है जहाँ गैसीय अभिकारकों की सांद्रता बढ़ जाती है,जिससे अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है। एक बार अभिक्रिया होने के बाद,उत्पादों का सतह के प्रति आकर्षण कम होता है और वे विशोषित हो जाते हैं,जिससे सक्रिय स्थान अन्य अभिकारक अणुओं के लिए मुक्त हो जाते हैं।