(N/A) कायिक प्रवर्धन अलैंगिक जनन की एक विधि है जिसमें पादपों के कायिक भागों से नए पौधे प्राप्त किए जाते हैं। इसमें नए पौधों के प्रवर्धन के लिए बीजों या बीजाणुओं का उत्पादन शामिल नहीं होता है। पादपों के कायिक भाग जैसे कि रनर्स,प्रकंद (rhizomes),अंतःभूस्तारी (suckers),कंद (tubers) आदि का उपयोग नए पौधों को उगाने के लिए प्रवर्ध्य (propagules) के रूप में किया जा सकता है।
कायिक जनन के उदाहरण निम्नलिखित हैं:
$1.$ आलू की आँखें: आलू की सतह पर कई कलिकाएँ होती हैं जिन्हें 'आँखें' कहा जाता है। जब इनमें से प्रत्येक कलिका को मिट्टी में दबाया जाता है,तो यह एक नए पौधे के रूप में विकसित हो जाती है,जो जनक पौधे के समान होता है।
$2.$ ब्रायोफिल्लम की पर्ण कलिकाएँ: ब्रायोफिल्लम पौधों की पत्तियों के किनारों पर कई अपस्थानिक कलिकाएँ (adventitious buds) होती हैं। जब ये पत्तियाँ मुख्य पौधे से अलग होकर नम मिट्टी के संपर्क में आती हैं,तो इन पर्ण कलिकाओं में वृद्धि करके छोटे पौधों में विकसित होने की क्षमता होती है।