(N/A) पवन के बहने का मूल कारण सूर्य की ऊर्जा द्वारा पृथ्वी की सतह का असमान रूप से गर्म होना है।
तमिलनाडु में स्थित कन्याकुमारी भारत का एक प्रमुख भाग है जहाँ पवन ऊर्जा का व्यावसायिक रूप से उपयोग किया जाता है।
तुलना:
$(i)$ पवन ऊर्जा और बहते जल की ऊर्जा दोनों नवीकरणीय और प्रदूषण मुक्त ऊर्जा स्रोत हैं।
$(ii)$ दोनों में गतिज ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा (जैसे टर्बाइन घुमाना) में और बाद में विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण शामिल है।
$(iii)$ बहते जल की शक्ति आमतौर पर पवन ऊर्जा की तुलना में अधिक सुसंगत और केंद्रित होती है,जो इसे बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के लिए अधिक कुशल बनाती है।
विकास में बाधाएँ:
$(i)$ पवन ऊर्जा: यह रुक-रुक कर उपलब्ध होती है और हर जगह उपलब्ध नहीं है। पवन फार्मों के लिए वर्ष के अधिकांश समय उच्च पवन गति वाले विशिष्ट स्थानों की आवश्यकता होती है।
$(ii)$ जल ऊर्जा: नदियों पर बड़े बांधों का निर्माण महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षति का कारण बनता है,आबादी को विस्थापित करता है,और यह केवल बारहमासी नदियों वाले विशिष्ट भौगोलिक स्थानों तक ही सीमित है।