(N/A) प्रबल विद्युत अपघट्य: वे विद्युत अपघट्य जो अपने जलीय विलयन में अधिकतम आयनीकरण दर्शाते हैं,उन्हें प्रबल विद्युत अपघट्य कहा जाता है। प्रबल विद्युत अपघट्य वाले विलयन की चालकता अधिक होती है। उदाहरण के लिए,$KCl, NaCl, KNO_{3}, NaNO_{3}, MgCl_{2}, CaCl_{2}, MgSO_{4}$ आदि। प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के लवण प्रबल विद्युत अपघट्य होते हैं।
$(b)$ विलयन की सांद्रता और $\Lambda_{m}$ का मान: प्रबल विद्युत अपघट्यों के लिए,तनुकरण के साथ $\Lambda_{m}$ धीरे-धीरे बढ़ता है और इसे निम्नलिखित समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है:
$\Lambda_{m} = \Lambda_{m}^{\circ} - A c^{1/2}$
जहाँ,
$\Lambda_{m} =$ प्रबल विद्युत अपघट्य की मोलर चालकता।
$\Lambda_{m}^{\circ} =$ प्रबल विद्युत अपघट्य की सीमांत मोलर चालकता।
$c = mol \ L^{-1}$ में विलयन की सांद्रता।
$A =$ स्थिरांक $=$ ग्राफ का ऋणात्मक ढाल।
| प्रबल विद्युत अपघट्य | $NaCl, KCl, CaCl_{2}, MgSO_{4}$ |
| संयोजकता या प्रकार | $1-1, 1-1, 2-1, 2-2$ |
$A$ का मान निम्नलिखित पर निर्भर करता है: $(i)$ विद्युत अपघट्य का प्रकार (धनात्मक और ऋणात्मक आयन) जैसे $1-1, 2-1, 2-2$ आदि,$(ii)$ तापमान और $(iii)$ दबाव।