(N/A) जब किसी पदार्थ पर तन्य या संपीड़ित बल लगाया जाता है,तो उत्पन्न पार्श्व विकृति (lateral strain) और अनुदैर्ध्य विकृति (longitudinal strain) के अनुपात को पॉइसन अनुपात कहा जाता है।
जब किसी तार पर तन्य बल लगाया जाता है,तो उसकी लंबाई बढ़ जाती है (अनुदैर्ध्य विकृति),जबकि उसके अनुप्रस्थ काट का व्यास कम हो जाता है (पार्श्व विकृति)।
इसके विपरीत,जब संपीड़ित बल लगाया जाता है,तो लंबाई कम हो जाती है और व्यास बढ़ जाता है।
गणितीय रूप से,पॉइसन अनुपात $(\mu)$ इस प्रकार है:
$\mu = -\frac{\text{पार्श्व विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}}$
यदि मूल व्यास $d$ है और व्यास में परिवर्तन $\Delta d$ है,तो पार्श्व विकृति $\frac{\Delta d}{d}$ है। यदि मूल लंबाई $L$ है और लंबाई में परिवर्तन $\Delta L$ है,तो अनुदैर्ध्य विकृति $\frac{\Delta L}{L}$ है।
अतः,$\mu = -\frac{(\Delta d / d)}{(\Delta L / L)}$.
चूंकि यह दो विकृतियों का अनुपात है,इसलिए यह एक विमाहीन और मात्रकहीन राशि है।
पॉइसन अनुपात का मान पूरी तरह से पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।