लंदन बल (London force) क्या है? इसकी विशेषताएं बताइए।

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(N/A) लंदन बल: सममित परमाणुओं या अध्रुवीय अणुओं के बीच मौजूद कमजोर आकर्षण बलों को लंदन बल या परिक्षेपण बल (dispersion forces) के रूप में जाना जाता है।
आकर्षण के इस बल का प्रस्ताव सबसे पहले जर्मन भौतिक विज्ञानी फ्रिट्ज़ लंदन द्वारा दिया गया था, और इसी कारण से, दो अस्थायी द्विध्रुवों के बीच आकर्षण बल को लंदन बल कहा जाता है।
विशेषताएं:
- इस बल का दूसरा नाम परिक्षेपण बल है।
- यह सममित परमाणुओं या अध्रुवीय अणुओं के बीच मौजूद होता है, उदा., $H_2, Cl_2, P_4, CH_4, CCl_4, C_6H_6$.
- ये हमेशा आकर्षण बल होते हैं।
- अन्योन्यक्रिया ऊर्जा दो परस्पर क्रिया करने वाले कणों के बीच की दूरी की छठी घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात $E \propto 1/r^6$, जहाँ $r$ दो कणों के बीच की दूरी है।
- ये बल केवल कम दूरी $(\sim 500 \ pm)$ पर महत्वपूर्ण होते हैं और इनका परिमाण कण की ध्रुवणता (polarisability) पर निर्भर करता है।

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