(N/A) धारा घनत्व: किसी बिंदु पर विद्युत धारा घनत्व को उस बिंदु पर धारा के लंबवत प्रति इकाई अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा की मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है। धारा घनत्व एक सदिश राशि है।
$\overrightarrow{J} = \frac{I}{A} \hat{n}$
$\text{मात्रक} = A/m^2 = A \cdot m^{-2}$
$\text{विमीय सूत्र} = [M^0 L^{-2} T^0 A^1]$
ओम के नियम का सदिश रूप:
$l$ लंबाई और $A$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले एक चालक पर विचार करें। माना कि उस पर आरोपित विद्युत क्षेत्र $E$ है। विभवांतर $V = E \cdot l$ है।
ओम के नियम के अनुसार,$V = I \cdot R$ है।
हम जानते हैं कि प्रतिरोध $R = \rho \cdot \frac{l}{A}$,जहाँ $\rho$ प्रतिरोधकता है।
ओम के नियम में $V$ और $R$ का मान रखने पर:
$E \cdot l = I \cdot \left( \frac{\rho \cdot l}{A} \right)$
$E = \left( \frac{I}{A} \right) \cdot \rho$
चूंकि धारा घनत्व $J = I/A$ है,इसलिए:
$E = J \cdot \rho$
चालकता $\sigma = 1/\rho$ का उपयोग करने पर:
$E = J / \sigma$
$J = \sigma \cdot E$
सदिश रूप में,इसे $\overrightarrow{J} = \sigma \overrightarrow{E}$ के रूप में लिखा जाता है,जो ओम के नियम का सदिश रूप है।