(N/A) आबंध एन्थैल्पी को गैसीय अवस्था में दो परमाणुओं के बीच एक मोल विशेष प्रकार के आबंधों को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा के रूप में परिभाषित किया गया है।
आबंध एन्थैल्पी की इकाई $kJ \ mol^{-1}$ है।
द्विपरमाणुक अणुओं के लिए,यह आबंध वियोजन एन्थैल्पी है। उदाहरण के लिए,$H_2$ के लिए:
$H_{2(g)} \rightarrow H_{(g)} + H_{(g)} ; \Delta_{a} H^{\ominus} = 435.8 \ kJ \ mol^{-1}$
$H_2O$ जैसे बहुपरमाणुक अणुओं में,दो $O-H$ आबंधों को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान नहीं होती है क्योंकि पहले आबंध के टूटने के बाद रासायनिक वातावरण बदल जाता है:
$H_2O_{(g)} \rightarrow H_{(g)} + OH_{(g)} ; \Delta_{a} H_{1}^{\ominus} = 502 \ kJ \ mol^{-1}$
$OH_{(g)} \rightarrow H_{(g)} + O_{(g)} ; \Delta_{a} H_{2}^{\ominus} = 427 \ kJ \ mol^{-1}$
जल में $O-H$ के लिए औसत आबंध एन्थैल्पी इन मानों का माध्य है: $(502 + 427) / 2 = 464.5 \ kJ \ mol^{-1}$।
ऊर्जा मानों में यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि एक हाइड्रोजन परमाणु के हटने के बाद $O-H$ आबंध का इलेक्ट्रॉनिक वातावरण बदल जाता है।