(N/A) रुद्धोष्म प्रक्रिया एक ऐसी ऊष्मागतिक प्रक्रिया है जिसमें निकाय और उसके परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है,अर्थात $\Delta Q = 0$।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से:
$\Delta Q = \Delta U + W$
चूंकि $\Delta Q = 0$,इसलिए $W = -\Delta U$।
रुद्धोष्म प्रक्रिया से गुजरने वाली एक आदर्श गैस के लिए,दाब $P$ और आयतन $V$ के बीच संबंध $PV^{\gamma} = K$ (स्थिरांक) है,जहाँ $\gamma = \frac{C_P}{C_V}$ रुद्धोष्म सूचकांक है।
अवस्था $(P_1, V_1)$ से $(P_2, V_2)$ तक विस्तार के दौरान किया गया कार्य $W$ है:
$W = \int_{V_1}^{V_2} P \, dV$
चूंकि $P = K V^{-\gamma}$,हम इसे समाकलन में प्रतिस्थापित करते हैं:
$W = \int_{V_1}^{V_2} K V^{-\gamma} \, dV = K \left[ \frac{V^{-\gamma+1}}{-\gamma+1} \right]_{V_1}^{V_2}$
$W = \frac{K}{1-\gamma} (V_2^{1-\gamma} - V_1^{1-\gamma})$
चूंकि $K = P_1 V_1^{\gamma} = P_2 V_2^{\gamma}$,हमें प्राप्त होता है:
$W = \frac{1}{1-\gamma} (P_2 V_2^{\gamma} V_2^{1-\gamma} - P_1 V_1^{\gamma} V_1^{1-\gamma})$
$W = \frac{P_2 V_2 - P_1 V_1}{1-\gamma} = \frac{P_1 V_1 - P_2 V_2}{\gamma - 1}$
आदर्श गैस नियम $PV = nRT$ का उपयोग करते हुए,इस व्यंजक को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है:
$W = \frac{nR(T_1 - T_2)}{\gamma - 1}$