(N/A) असामान्य मोलर द्रव्यमान किसी पदार्थ का वह मोलर द्रव्यमान है जो उसके रासायनिक सूत्र के आधार पर गणना किए गए अपेक्षित (सैद्धांतिक) मान से अधिक या कम होता है।
यह घटना विलयन में विलेय कणों के संयोजन (association) या वियोजन (dissociation) के कारण होती है।
$1$. संयोजन: जब विलेय के कण जुड़कर बड़े समूह बनाते हैं,तो कणों की संख्या कम हो जाती है,जिससे प्रेक्षित मोलर द्रव्यमान सैद्धांतिक मान से अधिक प्राप्त होता है।
$2$. वियोजन: जब विलेय के कण आयनों में टूट जाते हैं,तो कणों की संख्या बढ़ जाती है,जिससे प्रेक्षित मोलर द्रव्यमान सैद्धांतिक मान से कम प्राप्त होता है।
इस विचलन की सीमा को वांट हॉफ गुणांक $(i)$ का उपयोग करके व्यक्त किया जाता है।