(N/A) परिभाषा: समान ऊर्जा वाले एक $ns$ कक्षक और तीन $np$ कक्षकों के मिश्रण से समान आकार और ऊर्जा वाले चार समतुल्य संकर कक्षक बनने की प्रक्रिया को $sp^{3}$ संकरण कहा जाता है। परिणामी कक्षकों को $sp^{3}$ संकर कक्षक के रूप में जाना जाता है।
विशेषताएँ:
- प्रत्येक $sp^{3}$ संकर कक्षक में $25\%$ $s$-लक्षण और $75\%$ $p$-लक्षण होता है।
- चारों $sp^{3}$ संकर कक्षक एक नियमित चतुष्फलक के चार कोनों की ओर निर्देशित होते हैं।
- किन्हीं दो $sp^{3}$ संकर कक्षकों के बीच का बंध कोण $109^{\circ} 28^{\prime}$ (या $109.5^{\circ}$) होता है।
- ये कक्षक अन्य परमाणुओं के $s$,$p$ या अन्य संकर कक्षकों के साथ अंतर-परमाणु अक्ष पर अतिव्यापन करके सिग्मा $(\sigma)$ बंध बनाते हैं,जिसके परिणामस्वरूप चतुष्फलकीय ज्यामिति प्राप्त होती है।