(N/A) जैव-आवर्धन का तात्पर्य खाद्य श्रृंखला के क्रमिक पोषी स्तरों पर विषाक्त पदार्थों (जैसे $DDT$ या पारा जैसे जैव-अनिम्नीकरणीय प्रदूषक) की सांद्रता में होने वाली वृद्धि से है।
यह घटना इसलिए होती है क्योंकि किसी जीव द्वारा संचित विषाक्त पदार्थ का न तो चयापचय हो पाता है और न ही उत्सर्जन,और इस प्रकार यह उच्च सांद्रता में अगले उच्च पोषी स्तर तक पहुँच जाता है।
उदाहरण के लिए,एक जलीय खाद्य श्रृंखला में,$DDT$ की सांद्रता पानी से पादप प्लवक (phytoplankton),फिर जंतु प्लवक (zooplankton),छोटी मछली,बड़ी मछली और अंत में मछली खाने वाले पक्षियों तक बढ़ती है,जहाँ यह एक विषाक्त स्तर तक पहुँच जाती है जो कैल्शियम चयापचय में हस्तक्षेप कर सकती है,जिससे अंडों के कवच पतले हो जाते हैं।