(A) मासिक चक्र में चार मुख्य चरण होते हैं: रजोधर्म,कूपिक प्रावस्था,अंडोत्सर्ग प्रावस्था और ल्यूटियल प्रावस्था।
कूपिक प्रावस्था के दौरान,अंडाशय में प्राथमिक पुटिकाएं (primary follicles) विकसित होकर पूर्ण रूप से परिपक्व ग्राफियन पुटिका (Graafian follicle) बन जाती हैं।
साथ ही,गर्भाशय का अंतःस्तर (endometrium) प्रचुरोद्भवन (proliferation) की प्रक्रिया द्वारा पुनर्जीवित होता है।
ये परिवर्तन पीयूष ग्रंथि के हार्मोन ($LH$ और $FSH$) और अंडाशय के हार्मोन (एस्ट्रोजन) के स्तर द्वारा नियंत्रित होते हैं।
इस चरण के दौरान $LH$ और $FSH$ का स्तर बढ़ता है,जो कूपिक विकास को उत्तेजित करता है और बढ़ती हुई पुटिकाओं द्वारा एस्ट्रोजन का स्राव होता है।
$LH$ और $FSH$ दोनों चक्र के मध्य (लगभग $14$वें दिन) अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच जाते हैं। $LH$ का तीव्र स्राव,जिसे $LH$ सर्ज कहा जाता है,ग्राफियन पुटिका के फटने को प्रेरित करता है,जिससे अंडाणु मुक्त होता है,जिसे अंडोत्सर्ग (ovulation) कहा जाता है।