फसल सुधार कार्यक्रमों में पारंपरिक पादप प्रजनन विधियों की तुलना में ऊतक संवर्धन (Tissue culture) विधियों के क्या लाभ हैं?

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(N/A) ऊतक संवर्धन विधियों के लाभ निम्नलिखित हैं:
$(i)$ इन विधियों के अनुप्रयोग से बहुत कम समय में बड़ी संख्या में पौधों का प्रवर्धन प्राप्त करना संभव है।
$(ii)$ ऊतक संवर्धन के माध्यम से हजारों पौधों के उत्पादन की इस विधि को सूक्ष्म प्रवर्धन (Micro-propagation) कहा जाता है।
$(iii)$ इनमें से प्रत्येक पौधा आनुवंशिक रूप से उस मूल पौधे के समान होगा जिससे उन्हें उगाया गया था,अर्थात,वे सोमाक्लोन (Somaclones) हैं।
$(iv)$ टमाटर,केला,सेब आदि जैसे कई महत्वपूर्ण खाद्य पौधों का उत्पादन इस विधि का उपयोग करके व्यावसायिक स्तर पर किया गया है।
$(v)$ इस विधि का एक और महत्वपूर्ण अनुप्रयोग रोगग्रस्त पौधों से स्वस्थ पौधों को प्राप्त करना है। यद्यपि पौधा वायरस से संक्रमित होता है,फिर भी विभज्योतक (शीर्षस्थ और कक्षीय) वायरस से मुक्त होता है। इसलिए,वायरस-मुक्त पौधे प्राप्त करने के लिए विभज्योतक को हटाकर उसे इन-विट्रो (in-vitro) में उगाया जा सकता है। वैज्ञानिक केले,गन्ने,आलू आदि के विभज्योतक का संवर्धन करने में सफल रहे हैं।

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