(N/A) प्लाज्मिड छोटे,गोलाकार,दोहरे फंसे हुए $DNA$ अणु होते हैं जो कोशिका के गुणसूत्र $DNA$ से अलग होते हैं।
वे बैक्टीरिया कोशिका के कोशिका द्रव्य में पाए जाते हैं और स्वायत्त प्रतिकृति (autonomous replication) करने में सक्षम होते हैं।
बैक्टीरिया में उनकी भूमिका:
$1$. एंटीबायोटिक प्रतिरोध: प्लाज्मिड अक्सर ऐसे जीन ले जाते हैं जो एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध प्रदान करते हैं,जिससे बैक्टीरिया प्रतिकूल वातावरण में जीवित रह सकते हैं।
$2$. आनुवंशिक विनिमय: वे संयुग्मन (conjugation) जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से बैक्टीरिया के बीच क्षैतिज जीन स्थानांतरण (horizontal gene transfer) की सुविधा प्रदान करते हैं।
$3$. रोगजनकता कारक: कुछ प्लाज्मिड में ऐसे जीन होते हैं जो बैक्टीरिया की रोगजनकता या विषाणुता को बढ़ाते हैं।
$4$. चयापचय कार्य: उनमें जटिल कार्बनिक यौगिकों के क्षरण के लिए जीन हो सकते हैं,जो बैक्टीरिया के चयापचय में सहायता करते हैं।