(N/A) एनोड पर होने वाली ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
$(i)$ $Cl_{(aq)}^{-} \rightarrow \frac{1}{2} Cl_{2(g)} + e^{-}$; $E^{\circ} = 1.36 \ V$
$(ii)$ $2H_{2}O_{(l)} \rightarrow O_{2(g)} + 4H_{(aq)}^{+} + 4e^{-}$; $E^{\circ} = 1.23 \ V$
यद्यपि जल का मानक ऑक्सीकरण विभव $(1.23 \ V)$,$Cl^{-}$ $(1.36 \ V)$ से कम है,जो सैद्धांतिक रूप से यह सुझाव देता है कि जल का ऑक्सीकरण होना चाहिए,लेकिन $Cl^{-}$ का ऑक्सीकरण देखा जाता है।
यह ऑक्सीजन के 'अधिविभव' (overpotential) के कारण होता है। एनोड पर ऑक्सीजन गैस के निकलने के लिए मानक मान से अधिक विभव की आवश्यकता होती है,जिससे जल के ऑक्सीकरण के लिए प्रभावी विभव $1.36 \ V$ से काफी अधिक हो जाता है। परिणामस्वरूप,$Cl^{-}$ आयनों का प्राथमिकता से $Cl_{2}$ गैस में ऑक्सीकरण हो जाता है।