(N/A) जब धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत रखा जाता है,तो उस पर कार्य करने वाला बल अधिकतम होता है।
इस बल का परिमाण निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
$(i)$ चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता $(B)$।
$(ii)$ चालक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान $(I)$।
$(iii)$ चुंबकीय क्षेत्र में स्थित चालक की लंबाई $(L)$।
इस बल की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Left-Hand Rule) का उपयोग किया जाता है।
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम: अपने बाएं हाथ के अंगूठे,तर्जनी और मध्यमा को इस प्रकार फैलाएं कि वे एक-दूसरे के परस्पर लंबवत हों। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को और मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को दर्शाती है,तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को इंगित करेगा।