(N/A) विश्रांति काल $\tau$ को एक इलेक्ट्रॉन और जाली आयनों (lattice ions) के बीच दो क्रमिक टक्करों के बीच के औसत समय अंतराल के रूप में परिभाषित किया गया है।
$1$. $E$ क्षेत्र पर निर्भरता: जब एक बाहरी विद्युत क्षेत्र $E$ लगाया जाता है,तो इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्राप्त अपवाह वेग (drift velocity) $v_d$,उनके यादृच्छिक तापीय वेग ($10^5 \ m/s$ के क्रम में) की तुलना में बहुत छोटा ($10^{-3} \ m/s$ के क्रम में) होता है। चूंकि टक्कर की आवृत्ति मुख्य रूप से यादृच्छिक तापीय गति द्वारा निर्धारित होती है,इसलिए विश्रांति काल $\tau$ आरोपित $E$ क्षेत्र से लगभग स्वतंत्र रहता है। $\tau$ की यह स्थिरता यह सुनिश्चित करती है कि धारा घनत्व $J$,$E$ के सीधे आनुपातिक है $(J = \sigma E)$,जो ओम के नियम का सूक्ष्म रूप है।
$2$. $T$ पर निर्भरता: जैसे-जैसे तापमान $T$ बढ़ता है,इलेक्ट्रॉनों का यादृच्छिक तापीय वेग काफी बढ़ जाता है। इससे इलेक्ट्रॉनों और जाली आयनों के बीच अधिक बार टक्कर होती है,जिससे विश्रांति काल $\tau$ कम हो जाता है। समीकरण $\rho = \frac{m}{n e^2 \tau}$ के अनुसार,चूंकि तापमान बढ़ने के साथ $\tau$ घटता है,इसलिए चालक की प्रतिरोधकता $\rho$ बढ़ जाती है।