एक पादप के स्व-परागित उभयलिंगी (bisexual) पुष्प में फल बनने की संभावना एकलिंगाश्रयी (dioecious) पादप की तुलना में बहुत अधिक होती है। व्याख्या कीजिए।

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(N/A) स्व-परागित उभयलिंगी पुष्प में,नर और मादा प्रजनन अंग एक ही पुष्प के भीतर मौजूद होते हैं,जो बाहरी परागणकों की अनुपस्थिति में भी परागण और उसके बाद फल बनने की सुनिश्चितता प्रदान करते हैं।
इसके विपरीत,एकलिंगाश्रयी (dioecious) पादपों में नर और मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर होते हैं। यह अलगाव नर पौधे से मादा पौधे तक परागकणों को स्थानांतरित करने के लिए बाहरी परागण कारकों (जैसे हवा,पानी या कीट) की उपस्थिति को अनिवार्य बनाता है।
इसलिए,बाहरी कारकों पर निर्भरता के कारण एकलिंगाश्रयी पादपों में फल बनने की प्रक्रिया स्व-परागित उभयलिंगी पुष्पों की तुलना में कम निश्चित होती है।

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