आरेख पदार्थों $A$ और $B$ के लिए प्रतिबल-विकृति (stress-strain) वक्र को दर्शाता है। वक्रों से हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?

  • A
    $A$ भंगुर है लेकिन $B$ तन्य है
  • B
    $A$ तन्य है लेकिन $B$ भंगुर है
  • C
    $A$ और $B$ दोनों तन्य हैं
  • D
    $A$ और $B$ दोनों भंगुर हैं

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कथन $(A)$: तन्य (Ductile) धातुओं का उपयोग पतले तार बनाने के लिए किया जाता है।
कारण $(R)$: तन्य धातुओं के प्रतिबल-विकृति (stress-strain) वक्र में,प्रत्यास्थ सीमा और भंजन बिंदु को दर्शाने वाले बिंदुओं के बीच की लंबाई बहुत कम होती है।

एक धातु के लिए प्रतिबल-विकृति (stress-strain) ग्राफ दिखाया गया है। वह भाग जिसमें हुक का नियम लागू होता है,है

नीचे दिए गए ग्राफ में,बिंदु $B$ क्या दर्शाता है?

ग्राफ एक तार की लंबाई के व्यवहार को उस क्षेत्र में दर्शाता है जिसके लिए पदार्थ हुक के नियम का पालन करता है। $P$ और $Q$ क्या दर्शाते हैं?

स्तंभ-$I$ में दो प्रतिबल-विकृति ग्राफ दिए गए हैं और स्तंभ-$II$ में पदार्थों की प्रकृति दी गई है। उन्हें उचित रूप से सुमेलित करें:
स्तंभ-$I$स्तंभ-$II$
$(a)$ ग्राफ $A$$(i)$ $A$ तन्य (ductile) है
$(b)$ ग्राफ $B$$(ii)$ $A$ भंगुर (brittle) है
$(iii)$ $B$ तन्य (ductile) है
$(iv)$ $B$ भंगुर (brittle) है

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