(N/A) $(i)$ दोनों प्रतिरोधक पार्श्वक्रम (समांतर) संयोजन में जुड़े हैं क्योंकि प्रतिरोधकों के दोनों सिरे परिपथ के समान दो बिंदुओं से जुड़े हुए हैं।
$(ii)$ ओम के नियम के अनुसार,$I = \frac{V}{R}$। चूंकि प्रतिरोधक समांतर क्रम में हैं,इसलिए प्रत्येक प्रतिरोधक पर विभवांतर $(V)$ $3 \, V$ है।
$(a)$ $10 \, \Omega$ के प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा: $I_1 = \frac{V}{R_1} = \frac{3 \, V}{10 \, \Omega} = 0.3 \, A$।
$(b)$ $15 \, \Omega$ के प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा: $I_2 = \frac{V}{R_2} = \frac{3 \, V}{15 \, \Omega} = 0.2 \, A$।
$(iii)$ एमीटर परिपथ में प्रवाहित कुल विद्युत धारा $(I)$ को मापता है,जो अलग-अलग शाखाओं से प्रवाहित धाराओं का योग है:
$I = I_1 + I_2 = 0.3 \, A + 0.2 \, A = 0.5 \, A$।
अतः,एमीटर का पाठ्यांक $0.5 \, A$ है।