(N/A) $(i)$ दर्शाया गया दृष्टि दोष हाइपरमेट्रोपिया (दूरदृष्टि दोष) है।
$(ii)$ इस दोष के दो संभावित कारण निम्नलिखित हैं:
$(a)$ नेत्र गोलक (eyeball) का बहुत छोटा हो जाना,जिससे पास की वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणें रेटिना (दृष्टि पटल) के पीछे किसी बिंदु पर केंद्रित होती हैं।
$(b)$ नेत्र लेंस की फोकस दूरी का बहुत अधिक हो जाना,जिसका अर्थ है कि सिलियरी मांसपेशियां लेंस को इतना उत्तल नहीं बना पातीं कि प्रतिबिंब को रेटिना पर ठीक से केंद्रित किया जा सके।
$(iii)$ इस दोष को उपयुक्त शक्ति वाले उत्तल लेंस का उपयोग करके सुधारा जा सकता है। उत्तल लेंस आंख में प्रवेश करने से पहले प्रकाश किरणों को अभिसरित (converge) करता है,जिससे नेत्र लेंस प्रतिबिंब को ठीक रेटिना पर केंद्रित कर पाता है,जैसा कि आरेख में दिखाया गया है।